सत्यता के मैदान में । यह संसार
धर्मक्षेत्र है । इस संसार में यह निर्णय करना कि क्या सत्य (which does not change or decay with time) है वह धर्म है क्या मनुष्य के लिये उचित
कर्तव्य है एक मनुष्य के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्णय होते है । भूंख, निद्रा, भय, यौन सम्बंध यह तो मनुष्य और पशु दोनों में समान रूप
से होती है । उचित और अनुचित का विवेकधारक होने के कारण ही मनुष्य पशु से उत्कृष्ठ
होता है । विवेक के प्रयोग द्वारा ही मनुष्य उत्कृष्ठ स्थितियों को प्राप्त कर
सकता है ।
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