शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

श्री विजय कल्याण

सन्जय धृतराष्ट्र से आगे कहता है कि जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धारी पार्थ (अर्जुन) हैं, मुझे लगता है कि श्री (सौभाग्य), विजय, कल्याण और नीति भी अवश्य वहीं रहेगी ।

इस प्रकार सन्यास द्वारा मोक्ष नामक अठारहवां अध्याय पूर्ण हुआ । 

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

विस्मय

सन्जय धृतराष्ट्र से आगे कहता है कि जब जब मैं हरि (कृष्ण) के उस अत्यन्त आश्चर्यजनक विराट रूप को याद करता हूँ, तो मुझे बहुत विस्मय होता है, मैं बार-बार पुलकित हो उठता हूँ । 

बुधवार, 17 जनवरी 2018

पुलकित

सन्जय धृतराष्ट्र से आगे कहता है कि हे महाराज, मैं केशव (कृष्ण) और अर्जुन के इस अद्भुद और पवित्र संवाद को बारम्बार स्मरण करके आनन्द से पुलकित हो रहा हूँ । 

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

व्यास की कृपा

सन्जय ने धृतराष्ट्र से आगे बताते हुये सन्जय ने कहा कि व्यास की कृपा से मैंने स्वयं इस परम् रहस्यपूर्ण योग को साक्षात योगेश्वर कृष्ण द्वारा उपदेश देते हुये सुना है ।  

सोमवार, 15 जनवरी 2018

वासुदेव

सन्जय ने धृतराष्ट्र से बताया कि इस प्रकार मैंने वासुदेव (श्रीकृष्ण) और महान् आत्मा वाले पार्थ (अर्जुन) के मध्य हुये इस आश्चर्यजनक संवाद को सुना है, जिससे मेरे रोंगटे खडे हो गये हैं । 

रविवार, 14 जनवरी 2018

सन्कल्प का समर्पण

अर्जुन का युद्ध करने के निश्चय, में निहित हैं दो अवयव, पहला उसके अपने पूर्व के अपने सन्कल्प का समर्पॅण और दूसरा प्रकृति के आदेश को शिरोधार्य करने का निश्चय है । व्यक्ति के सन्कल्प को भी गुरू के उपदेश में नकारा गया है । प्रकृति के आदेश को शिरोधार्य करने की गुरू के उपदेश में अनुशंसा की गई है । इस प्रकार अर्जुन ने जो युद्ध करने का निश्चय किया वह गुरू के उपदेश को शिरोधार्य करने के फल से सम्भव हुआ है । 

शनिवार, 13 जनवरी 2018

प्रकृति को स्वीकारा

अर्जुन ने ज्ञान के उपदेश के फल से, नीयत कर्म अर्थात् प्रकृति द्वारा आदेशित कर्म को करने का निश्चय किया । उपदेश के पूर्व इसी कर्म को करने से अर्जुन विमुख होने का निश्चय कर रहा था । एक निश्चय और अनिश्चय की परिधि में था । गुरू के उपदेश से अर्जित हुई मानसिक शक्ति द्वारा, जागृत हुये विवेक से वह एक निश्चयात्मक निर्णय को करने में समर्थ हुआ । 

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

सन्देह समाप्त

अर्जुन गुरू द्वारा पूछे गये प्रश्न का उत्तर देते हुये कहता है कि हे अच्युत (श्रीकृष्ण) आपकी कृपा से मेरा मोंह नष्ट हो गया है और स्मृति लौट आयी है । अब मेरे सन्देह समाप्त हो गये हैं और मैं स्थिर हो गया हूँ । मैं आप के कहे के अनुसार कार्य करूँगा ।  

गुरुवार, 11 जनवरी 2018

गुरू का प्रश्न

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले हे पार्थ (अर्जुन) क्या तुमने एकाग्रचित्त होकर यह सब सुना है ? हे धनन्जय (अर्जुन) क्या तुम्हारा अज्ञान से उत्पन्न मोंह दूर हुआ है

बुधवार, 10 जनवरी 2018

पुण्यात्माओं के लोको

संवादो (गुरू योगेश्वर और शिष्य अर्जुन के मध्य संवाद) को सुनने का फल बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ बिना ईर्ष्या किये इन संवादो (गुरू योगेश्वर और शिष्य अर्जुन के मध्य संवाद) को सुनेगा, वह भी मुक्त होकर पुण्यात्माओं के आनन्दमय लोको में पहुँच जायेगा ।

मंगलवार, 9 जनवरी 2018

ज्ञान-यज्ञ

गुरू योगेश्वर और शिष्य अर्जुन के मध्य संवाद को अध्ययन करने का फल बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति इन संवादों का अध्ययन करेगा, उसके विषय में मैं समझूँगा कि वह ज्ञानयज्ञ द्वारा हमारी आराधना कर रहा है । 

सोमवार, 8 जनवरी 2018

बढकर प्रिय

अपने उपर आश्रित भक्त के विषय में और आगे बताते हुये योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बताये कि  मनुष्यों में उससे अधिक प्रिय, मेरा कार्य करने वाला दूसरा कोई नहीं है, और सन्सार में उससे बढकर प्रिय मुझे दूसरा कोई होगा भी नहीं ।  

रविवार, 7 जनवरी 2018

निश्चयात्मक उपलब्धि

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो  इस परम रहस्य को मेरे आश्रितों को उपदेश करता है और मेरे ऊपर पूर्णतया आश्रित रहता है, वह अवश्य मुझ तक पहुँचता है ।

शनिवार, 6 जनवरी 2018

नास्तिक अ-श्रद्धालु

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये तुम इस ज्ञान को किसी ऐसे व्यक्ति को मत बताना, जिसने जीवन में तप न किया हो, या जिसके अंदर श्रद्धा न हो, या जो आज्ञाकारी न हो, या जो मेरी बुराई करता हो । 

शुक्रवार, 5 जनवरी 2018

प्रकृति को समर्पित

व्यक्ति प्रकृति के निर्देशों को यथास्वरूप ग्राह्य नहीं कर पाता है । उसकी अपनी मनोवृत्तियाँ बाधक होती हैं । गुरू का उपदेश प्रशस्थ करता है कि व्यक्ति को अपने मनोवेगों को अन्कुश करके उसे प्रकृति द्वारा सृजित आदेशों को यथास्वरूप ग्रहण करने की दृढता होनी चाहिये । 

गुरुवार, 4 जनवरी 2018

त्रुटि से रक्षा

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि सब कर्तव्यों को छोडकर तुम केवल मेरी शरण में आ जाओ । तुम दु:खी मत हो, मैं तुम्हे तुम्हारे समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा । 

बुधवार, 3 जनवरी 2018

उत्थान पथ

गुरू ने आश्रित बनने के लिये जो उपदेश दिया उसका अभिप्राय है कि अज्ञान के कारण व्यक्ति दोष-पूर्ण कर्मों का कर्ता हैं जिसके फल से वह जीवन-मरण के चक्र में घूम रहा हैं, जो कि बन्धन है, इसलिये यदि व्यक्ति मुक्ति चाहता हो तो उसे अपने समस्त कर्मों को ईश्वर को अर्पित करके करने का पथ गुरू ने उपदेश किया है । व्यक्ति ईश्वर को समर्पित हो जाये तो वह व्यक्ति को उसके दोषपूर्ण कर्मों से रक्षा करेगा, अर्थात् उसका कर्म का कर्तापन का भाव क्षीण होगा, यह गुरू के उपदेश का सार है ।

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

मेरा आश्रित बन

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि तुम अपने मन को मुझ में लगा, मेरा आश्रित बन, मेरे लिये यज्ञ कर, मुझे प्रणाम कर । इस प्रकार तुम मुझ तक पहुँच जायेगा । मैं तुम्हे सचमुच इस बात का वचन देता हूँ क्योंकि तुम मुझे प्रिय हो । 

सोमवार, 1 जनवरी 2018

सर्वोच्च वचन

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि अब तुम मेरे सर्वोच्च वचनों को सुनो जो कि सभी वचनों में सबसे गोपनीय है परंतु तुम्हे मैं इसलिये बताऊंगा क्योंकि तुम मुझे अति प्रिय हो ।