गुरुवार, 31 अगस्त 2017

पूर्णता को अग्रसर

गुरू द्वारा असुरीय स्वभाव का वृतांत विस्तार से बताया जाना सूचक है कि हमें असुरीय स्वभाव को त्याग देना चाहिये । यह प्रकृति का पूर्व-निर्धारित क्रम नहीं होता है अपितु हमारे अविवेपूर्ण क्रियाओं का फल होता है । निर्वाण की ओर उन्मुख होना सदैव हमारे वश में होता है । पापी से भी पापी व्यक्ति भी जब भगवान की ओर उन्मुख हो जाता है तो वह निश्चय पूर्वक निर्वाण की स्थिति पर्यंत पहुँचता है । 

बुधवार, 30 अगस्त 2017

निम्नतम दशा

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि असुरी योनियों में पडे हुये ये मूढ प्राणी जन्म-जन्मांतर में भी मुझे प्राप्त नहीं कर पाते, अपितु हे कुंती के पुत्र (अर्जुन), ये निम्नतम दशा की ओर ही गिरते जाते हैं । 

मंगलवार, 29 अगस्त 2017

असुरीय योनियों

असुरीय स्वभाव वाले लोगोके विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि ऐसे क्रूर घृडितों को जो कि मनुष्यों में सबसे नीचे हैं और बुरे कर्मों को करने वाले हैं, मैं उन्हे इस जन्म मरण के इस चक्कर में सदा असुरीय योनियों में ही भेजता रहता हूँ । 

सोमवार, 28 अगस्त 2017

अहंकार बल

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि अहंकार, बल और अभिमान और काम और क्रोध के वश में होकर ये द्वेषी लोग, उनके अपने तथा अन्य लोगों के शरीरों में निवास करने वाले मुझ, से घृणा करते हैं । 

रविवार, 27 अगस्त 2017

मिथ्या गर्व

असुरीय स्वभाव वाले लोगोके विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मिथ्या गर्व में भूले, हठी, अभिमान और धन के अहंकार से भरे वे उन यज्ञों को, जो केवल नाम के यज्ञ होते हैं, पाखण्ड के भाव के साथ और नियमों का ध्यान रखे बिना करते हैं । 

शनिवार, 26 अगस्त 2017

अपवित्र नरक

असुरीय स्वभाव वाले लोगोके विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि अनेको विचारों के कारण भ्रांत, मूढता के जाल में फँसे हुये और इच्छाओं की तृप्ति के आदी बने वे अपवित्र नरक में गिरते हैं । 

शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

मैं दान दूँगा

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं धनवान हूँ और ऊँचे कुल में उत्पन्न हुआ हूँ, मेरे समान और कौन है ? मैं यज्ञ करूँगा, मैं दान दूँगा, मैं आनंद मनाऊँगा,’ वे अज्ञान के कारण मूढ बने हुये इस प्रकार की बाते करते हैं । 

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

मैं सफल हूँ

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि इस शत्रु को मैंने मार डाला है और अन्य शत्रुओं को मैं मार डालूँगा, मैं ईशवर हूँ, मैं उपभोग करने वाला हूँ, मैं सफल हूँ, मैं बलवान हूँ और सुखी हूँ.......  

बुधवार, 23 अगस्त 2017

क्रमिक इच्छायें

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि यह आज मैंने प्राप्त कर लिया है, इस इच्छा को मैं पूरा कर लूँगा । यह मेरा है और यह धनभी (भविष्य में) मेरा हो जायेगा.......  

मंगलवार, 22 अगस्त 2017

वासना क्रोध

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि लालसाओं के सैकडों जालों में बंधे हुये, वासना और क्रोध के वश में होकर वे अपनी इच्छाओं को तृप्ति के लिये अन्यायपूर्ण उपायों द्वारा ढेरों सम्पत्ति एकत्रित करने के लिये प्रयत्न करते हैं...... 

सोमवार, 21 अगस्त 2017

इच्छाओं की तृप्ति

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि असीमित इच्छायें जो कि मृत्यु के साथ ही समाप्त होंगी, एवं इच्छापूर्ति को ही सर्वोच्च लक्ष्य मानते हुये और यह समझते हुये कि बस यही सब कुछ हैं……. 

रविवार, 20 अगस्त 2017

अपवित्र निश्चय

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि कभी तृप्त न होने वाली लालसा के वशीभूत होकर पाखण्ड, अत्यधिक अभिमान और अहंकार से युक्त मूढता के कारण गलत दृष्टिकोण अपनाकर वे अपवित्र निश्चयों के अनुसार कार्य करते हैं....... 

शनिवार, 19 अगस्त 2017

अल्पबुद्धि

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि इस दृष्टिकोण को दृढतापूर्वक अपना कर वे अल्पबुद्धि, नष्टात्मा और क्रूरकर्मा लोग संसार के शत्रु बनकर इसके विनाश के लिये उठ खडे होते हैं.......

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

अवास्तविक

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि वे कहते हैं कि यह संसार अवास्तविक है, इसका कोई आधार नहीं है, इसका कोई ईश्वर (स्वामी) नहीं है, यह किसी नियमित कारण के परिणाम-स्वरूप नहीं बना है, संक्षेप में, यह केवल इच्छा द्वारा बना है........ 

गुरुवार, 17 अगस्त 2017

प्रवृत्ति निवृत्ति

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि असुरीय स्वभाव वाले लोग ना ही कर्म (प्रवृत्ति) के मार्ग को जानते हैं और ना ही त्याग (निवृत्ति) के मार्ग को जानते हैं । उनमें ना पवित्रता पाई जाती है, ना सदाचार और ना सत्य ही उनमें पाया जाता है…… 

बुधवार, 16 अगस्त 2017

असुरीय स्वभाव

 गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि इस संसार में दो प्रकार के प्राणीयों का सृजन किया गया है । दैवीय और दूसरे असुरीय । दैवीय स्वभाव वालों का विस्तार से वर्णन किया जा चुका है । हे पार्थ (अर्जुन), अब तू मुझसे असुरीय स्वभाव वाले लोगों के विषय में सुन । 

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

मोक्षदायक

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि दैवीय गुणों की सम्पदा मोक्ष को प्रशस्थ करने वाली होती हैं और असुरी गुणों की सम्पदा बंधन प्रशस्थ करने वाली होती है । हे पाण्डव (अर्जुन) तू दु:खी मत हो, क्योंकि तू (दिव्य भवितव्यता के लिये) दिव्य सम्पदा लेकर उत्पन्न हुआ है । 

सोमवार, 14 अगस्त 2017

पाखण्ड

असुरीय स्वभाव वाले लोगो के गुणो को बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि पाखण्ड, घमण्ड, अत्यधिक अभिमान, क्रोध, कठोरता और अज्ञान हे पार्थ (अर्जुन), ये उन लोगो की विशेषतायें हैं, जो असुरीय स्वभाव लेकर पैदा होते हैं । 

रविवार, 13 अगस्त 2017

प्रकाश अंधकार

गुरू द्वारा दैवीय स्वभाव वाले लोगो के गुण बताये गये जिसका कंचिद ऐसा अर्थ नहीं लिया जाना चाहिये कि कुछ लोग देव पुरुष और कुछ लोग दानव पुरुष रूप मे होते हैं । यह प्रत्येक मनुष्य में विद्यमान गुणों की गणना है । अंतर पडता है उन गुणों के प्रति आस्था द्वारा । जो व्यक्ति ब्रम्ह ज्ञान को उन्मुख हैं वे अपने अंदर विद्यमान दैवीय गुणों को विकसित करने में निष्ठावान होते हैं । इसके विपरीत जो लोग पद, प्रतिष्ठा, मान, लक्ष्मी, वैभव के लिये आतुर होते हैं वे अपने अंदर विद्यमान दैवीय गुणों की उपेक्षा कर असुरी गुणों का भी पोषण करते हैं । 

शनिवार, 12 अगस्त 2017

क्षमा तेज

दैवीय स्वभाव वाले लोगों के श्रेय के विषय मे आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता, द्वेषहीनता, अत्यंत अभिमानी ना होना, हे भारत (अर्जुन), ये उन व्यक्तियों के गुण है, जो दैवीय स्वभाव लेकर जन्म लेता है । 

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

अचंचलता

दैवीय स्वभाव वाले लोगों के श्रेय के विषय मे आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि अहिंसा, सत्य, क्रोधरहितता, त्याग, शांति, दूसरों के दोष ढूठने से विरति, प्राणियों पर दया, लोभरहितता, मृदुता, लज्जा और अचंचलता...... 

गुरुवार, 10 अगस्त 2017

मन की शुद्धता

दैवीय स्वभाव वाले लोगों के श्रेय के विषय मे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि निर्भयता, मन की शुद्धता, ज्ञान और योग का बुद्धिमत्तापूर्ण विभाग, दान, आत्म-संयम और यज्ञ, शास्त्रों का अध्ययन, तप और ईमानदारी……. 

बुधवार, 9 अगस्त 2017

रहस्यपूर्ण सिद्धांत

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि इस प्रकार हे पापरहित (अर्जुन), मैंने तुझे यह सबसे अधिक रहस्यपूर्ण सिद्धांत बता दिया है । हे भारत (अर्जुन), इसको जानने के बाद मनुष्य ज्ञानी बन जाता है और उसके सब कर्तव्य पूर्ण हो जाते हैं ।

इस प्रकार “पुरुषोत्तम योग” नामक पंद्रहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ । 

मंगलवार, 8 अगस्त 2017

भ्रांतिहीन होकर

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो कोई भ्रांतिहीन होकर मुझ पुरुषोत्तम को इस प्रकार जान लेता है, समझो कि उसने सब कुछ जान लिया है । हे भारत (अर्जुन), वह अपनी सम्पूर्ण आत्मा से मेरी उपासना करता है । ज्ञान भक्ति की ओर ले जाता है । 

सोमवार, 7 अगस्त 2017

पुरुषोत्तम

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको बताये कि क्योंकि मैं क्षर (नश्वर) से ऊपर हूँ और अक्षर से भी ऊपर हूँ, इसलिये इस संसार में और वेदों में मैं ही पुरुषोत्तम जाना जाता हूँ । 

रविवार, 6 अगस्त 2017

उच्चतर तथा निम्नतर

गुरु ने अपने उपदेश में इस संसार में जिन दो पुरुषों को बताया है, उनमें से एक ब्रम्ह की अपरिवर्तनीय, अविनाशी, अकार्यकारी उच्चतर प्रकृति है जिसे “आत्मा” की संज्ञा दी जाती है तथा दूसरा विनाशशील, परिवर्तनशील, कार्यकारी निम्नतर प्रकृति है जिससे इस रूप संसार की समस्त वस्तु एवं जीवशरीरों का निर्माण हुआ है और जिसे “प्रकृति” की संज्ञा दी जाती है ।

शनिवार, 5 अगस्त 2017

परम आत्मा

इस संसार का आधार आत्मा के विषय में और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि परंतु इनसे (जगत् से) भिन्न एक अस्तित्व आत्मा है, जिसे परम आत्मा भी कहा जाता है, जो अमर ईश्वर के रूप में इन तीनों लोको में प्रविष्ट होता है और इनका भरण पोषण करता है । 

शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

नश्वर और अनश्वर

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि इस संसार में दो पुरुष हैं. एक नश्वर और दूसरा अनश्वर, नश्वर ये सब अस्तित्व (वस्तु व व्यक्ति) है, जो समय के साथ परिवर्तनशील हैं और अपरिवर्तनशील (कूटस्थ) अनश्वर है । 

गुरुवार, 3 अगस्त 2017

स्मृति और ज्ञान

जीवित प्राणियों और वनस्पतियों में ब्रम्ह के समाये स्वरूप के विस्तार को और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं सबके हृदय में बैठा हुआ हूँ, मुझसे ही उनकी स्मृति और ज्ञान हैं तथा उनका विनाश भी होता है । वस्तुत: मैं ही वह हूँ, जिसे सब वेदों द्वारा जाना जाता है । मैं ही वेदांत को बनाने वाला हूँ और मैं ही वेदों का जानने वाला हूँ । 

बुधवार, 2 अगस्त 2017

जीवन की अग्नि

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जीवित प्राणियों में मैं जीवन की अग्नि बनकर और उनके अंदर आने वाली श्वास तथा बाहर निकलने वाली श्वास में मिलकर चारो प्रकार के अन्नों को पचाता हूँ । 

मंगलवार, 1 अगस्त 2017

धारण पोषण

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको बताये कि इस पृथ्वी में प्रविष्ट होकर मैं अपनी प्राण शक्ति द्वारा सब प्राणियों को धारण करता हूँ, और रस से भरा हुआ सोम (चंद्रमा) बनकर मैं सब जडी बूटियों (या बनस्पतियों) का पोषण करता हूँ ।