यह संसार नैतिक संघर्ष का क्षेत्र
है । नैतिक – क्या उचित है उसे अपनाना है और क्या अनुचित है उसे
त्यागना है । मनुष्य का हृदय (concept) युद्ध स्थल होता है जहाँ संघर्ष के मुद्दे विद्यमान रहते हैं । यह प्रतिदिन
प्रतिपल का संघर्ष होता है । धर्म के पथ से उचित के चुनाव द्वारा मनुष्य को दु:ख त्रास से स्वतंत्रता तक एवं
रूपों के संसार से सत्यलोक पर्यंत पहुँचने का पथ मिलता है । यह संसार कर्मभूमि है
। कर्म करके मनुष्य अपने अंदर विद्यमान आत्मा की इस शरीर में उपस्थिति के उद्देष्य
की पूर्ति करता है ।
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