शनिवार, 24 जनवरी 2015

संसार धर्मक्षेत्र

यह संसार नैतिक संघर्ष का क्षेत्र है । नैतिक क्या उचित है उसे अपनाना है और क्या अनुचित है उसे त्यागना है । मनुष्य का हृदय (concept)  युद्ध स्थल होता है जहाँ संघर्ष के मुद्दे विद्यमान रहते हैं । यह प्रतिदिन प्रतिपल का संघर्ष होता है । धर्म के पथ से उचित के चुनाव द्वारा मनुष्य को दु:ख त्रास से स्वतंत्रता तक एवं रूपों के संसार से सत्यलोक पर्यंत पहुँचने का पथ मिलता है । यह संसार कर्मभूमि है । कर्म करके मनुष्य अपने अंदर विद्यमान आत्मा की इस शरीर में उपस्थिति के उद्देष्य की पूर्ति करता है ।  

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