सोमवार, 26 जनवरी 2015

उत्कर्ष और मोंहासक्ति

गीता में वर्णित पाण्डव और कौरव का युद्ध उत्कर्ष और मोहासक्ति की लक्षणात्मक अभिव्यक्ति है । पाण्डव सही चुनाव द्वारा धर्मपथ से उत्कर्ष की ओर प्रगति का प्रतिनिधित्व करते हैं । कौरव अधिक प्रकृतीय मोंह की ओर यात्रा का प्रतिनिधित्व करते हैं । देववृत्ति और राक्षस वृत्ति का युद्ध । धर्म जिसे अपनाने से मनुष्य सत्य की ओर अग्रसर होता है । अधर्म जिसे अपनाने से मनुष्य और अधिक प्रकृतीय मोंह की ओर अग्रसर होता है । धर्म और अधर्म दोनों की उत्पत्ति एक ही सत्य के मूल से सम्भव हुई है । मात्र उचित के चुनाव के भेद से दोनों के फल भिन्न होते हैं ।  

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