शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

कौरव पाण्डव युद्ध

मनुष्य के हृदय में प्रतिदिन प्रतिपल चलने वाला युद्ध है । दुर्वृत्तियों और सद्वृत्तियों के मध्य युद्ध है । प्रकृतीय मोंह और आत्मज्ञान के मध्य का अंतराल है । यह युद्ध प्रत्येक मनुष्य के हृदय में चलता है । अर्जुन नाम मात्र एक उदाहरण है । एक मनुष्य जो अब तक प्रकृतीय मोंह में जीवन यापन कर रहा था । उसे जब प्रकृतीय मोंह को त्याग आत्मज्ञान की ओर उन्मुख होने की जिज्ञासा हुई तो यह युद्ध उसके हृदय में चलेगा । 

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