मनुष्य के हृदय में प्रतिदिन प्रतिपल चलने वाला युद्ध है । दुर्वृत्तियों और
सद्वृत्तियों के मध्य युद्ध है । प्रकृतीय मोंह और आत्मज्ञान के मध्य का अंतराल है
। यह युद्ध प्रत्येक मनुष्य के हृदय में चलता है । अर्जुन नाम मात्र एक उदाहरण है
। एक मनुष्य जो अब तक प्रकृतीय मोंह में जीवन यापन कर रहा था । उसे जब प्रकृतीय
मोंह को त्याग आत्मज्ञान की ओर उन्मुख होने की जिज्ञासा हुई तो यह युद्ध उसके हृदय
में चलेगा ।
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