गीता में पाण्डव और कौरवों के युद्ध के प्रसंग में रथ शब्द का प्रयोग किया गया
है । यह भी लक्षणात्मक अभिव्यक्ति है । रथ के घोडे मनुष्य की पाँच इंद्रियों के
प्रतीक हैं । इन घोडों को नियंत्रित रखने के लिये लगाम की रस्सी मनुष्य के बुद्धि
की अभिव्यक्ति है । रथ चालक के रूप में संचालक आत्मा की अभिव्यक्ति है । अर्जुन के
रथ के संचालक परम् सत्य के अवतार स्वरूप श्रीकृष्ण स्वयँ हैं ।
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