रविवार, 25 जनवरी 2015

जीवन एक संघर्ष

मनुष्य के जीवन के संघर्ष में एक पक्ष होता है बुराइयों का शमन करना तो दूसरा पक्ष होता है उत्कर्ष की प्राप्ति के लिये प्रयत्न करना । दोनो पक्ष एक दूसरे के सम्मुख होते हैं । इस संसार में अपूर्णता, बुराई, और अकारण विघ्न विद्यमान हैं । उचित कर्म द्वारा मनुष्य बुराई को उत्कर्ष मे पर्णित कर सकता है अपूर्णता को  पूर्णता में पर्णित कर सकता है और अकारण विघ्न को सकारण हल में पर्णित कर सकता है । युद्ध त्रास भी होता है और मर्यादा (discipline) की स्थापना भी होता है ।

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