युद्ध क्षेत्र को धर्म क्षेत्र भी
कहा जाता है । उचित के चुनाव का क्षेत्र । परम् सत्य जो धर्म ( उचित ) का रक्षक भी
होता है वह स्वयं भी युद्ध क्षेत्र अर्थात् मनुष्य के हृदय में आत्मा के रूप में
विद्यमान रहता है । गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण मोहासक्त अर्जुन को जीवन का सत्य रूप
बताते है । फिर उचित कर्म का चुनाव स्वयं करने के लिये अर्जुन को ही कहते हैं ।
धर्मदर्शन मनुष्य को सत्य स्थिति को बताता है । चुनाव प्रत्येक मनुष्य को स्वयं
अपने ही करना होता है ।
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