शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

रूप विस्तार चरण 8

ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से प्रगट करने वाले रूपों की गणना को और आगे बताते हुये गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बताये कि अस्त्रों में मैं बज्र हूँ, गायों में मैं कामधेनु हूँ, संतान उत्पन्न करने वालों में मैं कंदर्प हूँ, सर्पों में मैं वसुकी हूँ । 
एक संदेश
इस रूप संसार का स्वरूप विषय चेतना का फल होता है । इस संसार के प्रपंचो का विस्तार मस्तिष्क की चेतना का फल होता है । इन समस्त अविद्या विस्तार से मुक्ति आत्मबोध का फल होता है । ज्ञान का फल मोक्ष होता है । 

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