गुरुवार, 10 नवंबर 2016

जपयज्ञ

ब्रम्ह का ध्यान । ध्यान की प्रक्रिया में साधक व्यक्ति अपने मस्तिष्क को अभ्यास का अवसर प्रदान करता है । अभ्यास अपने अंत:करण में स्थित उस परम् सत्य की क्षवि को अनुभव करने का जिसके प्रसाद से साधक का अस्तित्व है । ध्यान की दशा में केंन्द्रित मस्तिष्क अन्य सांसारिक विषयों से मुक्त दशा में होने से शांति की अनुभूति करता है । 

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