हिंदू धर्म के सम्पूर्ण ग्रंथों में
केवल भगवद्गीता के ग्रंथकार नें इस शब्द का प्रयोग मात्र एक अवसर पर ही किया है ।
इस शब्द का अर्थ है “नियंत्रण करने वाली शक्ति” । नियंत्रक शक्तियाँ अनेक बतायी
गयी हैं परंतु “समय” सर्वाधिक शक्तिमान नियंत्रक होता है । प्रत्येक रूप एवं घटना
का नियंत्रक “समय” है ।
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