वेदों में वर्णित संत देवऋषि नारद
को ब्रम्हा का पुत्र बताया गया है । इन्होने विवाह नहीं किया था । यह ऐसे संत थे
जिन्हे कि इस विनाशहील संसार से ज़रा भी मोंह नहीं था । “नारद भक्ति सूत्र” इनका
रचा हुआ ग्रंथ है जो कि ईश्वर प्रेम के क्षेत्र में एक मानक ग्रंथ है । भक्ति
द्वारा ईश्वर प्राप्ति का पथ जानना है तो व्यक्ति को अध्ययन एवं अनुसरण करना होगा
“नारदभक्ति सूत्र” में व्यक्त पथ । नारद पुराण 18 पुराणों में से एक है ।
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