रविवार, 14 जनवरी 2018

सन्कल्प का समर्पण

अर्जुन का युद्ध करने के निश्चय, में निहित हैं दो अवयव, पहला उसके अपने पूर्व के अपने सन्कल्प का समर्पॅण और दूसरा प्रकृति के आदेश को शिरोधार्य करने का निश्चय है । व्यक्ति के सन्कल्प को भी गुरू के उपदेश में नकारा गया है । प्रकृति के आदेश को शिरोधार्य करने की गुरू के उपदेश में अनुशंसा की गई है । इस प्रकार अर्जुन ने जो युद्ध करने का निश्चय किया वह गुरू के उपदेश को शिरोधार्य करने के फल से सम्भव हुआ है । 

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