भगवद्गीता
सोमवार, 15 जनवरी 2018
वासुदेव
सन्जय ने धृतराष्ट्र से बताया कि इस प्रकार मैंने वासुदेव (श्रीकृष्ण) और महान् आत्मा वाले पार्थ (अर्जुन) के मध्य हुये इस आश्चर्यजनक संवाद को सुना है
,
जिससे मेरे रोंगटे खडे हो गये हैं ।
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