भगवद्गीता
शुक्रवार, 19 जनवरी 2018
श्री विजय कल्याण
सन्जय धृतराष्ट्र से आगे कहता है कि जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धारी पार्थ (अर्जुन) हैं
,
मुझे लगता है कि श्री (सौभाग्य)
,
विजय
,
कल्याण और नीति भी अवश्य वहीं रहेगी ।
इस प्रकार
‘
सन्यास द्वारा मोक्ष
’
नामक अठारहवां अध्याय पूर्ण हुआ ।
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