शनिवार, 13 जनवरी 2018

प्रकृति को स्वीकारा

अर्जुन ने ज्ञान के उपदेश के फल से, नीयत कर्म अर्थात् प्रकृति द्वारा आदेशित कर्म को करने का निश्चय किया । उपदेश के पूर्व इसी कर्म को करने से अर्जुन विमुख होने का निश्चय कर रहा था । एक निश्चय और अनिश्चय की परिधि में था । गुरू के उपदेश से अर्जित हुई मानसिक शक्ति द्वारा, जागृत हुये विवेक से वह एक निश्चयात्मक निर्णय को करने में समर्थ हुआ । 

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