समस्त साधना का लक्ष्य होता है
मोक्ष । जीवन मरण का चक्र कर्म और कर्मफल से सतत् चलता रहता है । इच्छा-जनित कर्मों के परित्याग के द्वारा कर्मफल
की कामना से मुक्त कर्म सम्भव है । कर्म और कर्मफल का नियम इच्छा-जनित कर्मों पर प्रभावी होता है । इसलिये
लक्ष्य की उपलब्धि के लिये सबसे प्रभावी परिणाम कर्मफल की कामना से मुक्त कर्म
द्वारा ही सम्भावित होती है ।
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