सोमवार, 3 अप्रैल 2017

प्रयत्न की समीक्षा

चिदानंद ब्रम्ह स्वरूप के साथ युक्त होने के लिये साधक को अपने स्व को लाँघकर अपने आत्मा के स्वरूप में समाहित होना होगा । पुरुषोत्तम स्वरूप के साथ युक्त होने के लिये साधक को अपने स्व को शून्य करना होगा । कठिन दोनो ही है । आत्मा की अनुभूति करने वाला साधक स्वयं ब्रम्ह स्वरूप हो जायेगा । स्व को शून्य करने पर साधक पुरुषोत्तम स्वरूप में विलीन हो जायेगा । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें