चिदानंद ब्रम्ह स्वरूप के साथ युक्त
होने के लिये साधक को अपने स्व को लाँघकर अपने आत्मा के स्वरूप में समाहित होना
होगा । पुरुषोत्तम स्वरूप के साथ युक्त होने के लिये साधक को अपने स्व को शून्य
करना होगा । कठिन दोनो ही है । आत्मा की अनुभूति करने वाला साधक स्वयं ब्रम्ह
स्वरूप हो जायेगा । स्व को शून्य करने पर साधक पुरुषोत्तम स्वरूप में विलीन हो
जायेगा ।
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