गुरू ने क्षेत्र के चौबीस घटक बताये
– पाँच महान तत्व (क्षिति,
जल, गगन, पावक,
समीर) वासनायें – यह अपूर्ण
इच्छाओं का सन्ग्रह है, विवेक – बुद्धि, यह विश्लेष्णात्मक क्षमता है, अव्यक्त – प्रकृति का अस्तित्व अव्यक्त
होता है, दस इंद्रियाँ – पाँच
ज्ञानेंद्रियाँ तथा पाँच कर्मेंन्द्रियाँ, मस्तिष्क – विचारों के प्रवाह का स्थल, पाँच ज्ञानेंद्रियों के पाँच विषय – गंध, स्वाद, दृष्य, स्वर, ताप । समस्त अनुभव ग्रहण के आधार हैं । साँख्य दर्शन द्वारा
प्रशस्थ प्रकृति के चौबीस विभाजन हैं ।
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