गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

अवयवों की व्याख्या

गुरू ने क्षेत्र के चौबीस घटक बताये – पाँच महान तत्व (क्षिति, जल, गगन, पावक, समीर) वासनायें – यह अपूर्ण इच्छाओं का सन्ग्रह है, विवेक – बुद्धि, यह विश्लेष्णात्मक क्षमता है, अव्यक्त – प्रकृति का अस्तित्व अव्यक्त होता है, दस इंद्रियाँ – पाँच ज्ञानेंद्रियाँ तथा पाँच कर्मेंन्द्रियाँ, मस्तिष्क – विचारों के प्रवाह का स्थल, पाँच ज्ञानेंद्रियों के पाँच विषय – गंध, स्वाद, दृष्य, स्वर, ताप । समस्त अनुभव ग्रहण के आधार हैं । साँख्य दर्शन द्वारा प्रशस्थ प्रकृति के चौबीस विभाजन हैं । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें