गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको
बताये कि इस ज्ञान को ऋषियों द्वारा अनेको विधि से ब्रम्ह को प्रसन्न करने वाले
प्रशंसा गायनों में विशिष्ट सुरनादों में गाया गया है तथा ब्रम्हसूत्र में कारणों
का उल्लेख करते हुये विशिष्ट निर्णयात्मक अभिव्यक्ति द्वारा उल्लेख किया गया है ।
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