क्षेत्र और क्षेत्र का जानने वाला ।
विषय और वस्तु । जानने वाला विषय है और क्षेत्र वस्तु स्वरूप है । इस दृष्टि से
देखने पर मस्तिष्क में जनित होने वाले आवेग भी वस्तु रूप ही है । अहंकार भ्रम है ।
भले ही इस भ्रम का विस्तार इतना प्रचुर है कि यह आम सत्य है । फिरभी अध्ययन की
परिधि में भ्रम को किसी भी भाँति विषय तो नहीं माना जा सकता है ।
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