शनिवार, 29 अप्रैल 2017

विस्तार की व्याख्या

क्षेत्र और क्षेत्र का जानने वाला । विषय और वस्तु । जानने वाला विषय है और क्षेत्र वस्तु स्वरूप है । इस दृष्टि से देखने पर मस्तिष्क में जनित होने वाले आवेग भी वस्तु रूप ही है । अहंकार भ्रम है । भले ही इस भ्रम का विस्तार इतना प्रचुर है कि यह आम सत्य है । फिरभी अध्ययन की परिधि में भ्रम को किसी भी भाँति विषय तो नहीं माना जा सकता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें