गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि जो योगी इन समस्त
तथ्यों को जानते हुये अक्षर ब्रम्ह से युक्त रहते हुये जीवन के समस्त कर्मों को
करता है वह अक्षर ब्रम्ह की स्थिति को प्राप्त होता है ।
इस प्रकार अक्षर ब्रम्ह से योग नामक आठवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ।
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