रविवार, 13 मार्च 2016

ब्रम्ह समाहित

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि जो योगी इन समस्त तथ्यों को जानते हुये अक्षर ब्रम्ह से युक्त रहते हुये जीवन के समस्त कर्मों को करता है वह अक्षर ब्रम्ह की स्थिति को प्राप्त होता है ।

इस प्रकार अक्षर ब्रम्ह से योग नामक आठवाँ अध्याय पूर्ण हुआ । 

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