सत्य को जानना ज्ञान है । सत्य की अभिव्यक्ति उसकी प्रकृति को
विस्तार से एवं क्रमबद्ध रूप से जानना विज्ञान है । ज्ञान के लिये व्यक्ति को
उपलब्ध ज्ञानेंद्रियाँ अक्षम होती हैं । इसलिये ज्ञान की अनुभूति ही सम्भव हो सकता
है । इस अनुभूति के लिये सत्य के प्रगट रूप उसकी प्रकृति का विस्तार पूर्वक ज्ञान
आवश्यक वाँक्षना है इसलिये गुरू ने अर्जुन से कहा कि मैं तुम्हे सत्य की अनुभूति
पाने का रहस्य विज्ञान सहित बताऊँगा ।
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