भगवद्गीता
शनिवार, 26 मार्च 2016
समाहित दशा
ब्रम्ह के रहस्य को बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि यह पूरा रूप संसार मेरी अपरिवर्तनीय अरूपधारी प्रकृति से युक्त होकर हमारे अंदर समाहित दशा में है जबकि मैं उसमें नहीं हूँ ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें