रूपों को अवलम्ब देने के लिये उच्च प्रकृति आत्मा की रूप में
स्थापना – प्रभव, पुन: रूप की प्रकृति में विलय की
दशा – प्रलय, तथा आत्मा की इस प्रभव और प्रलय की
बाध्य परिस्थितियों से मुक्ति – मोक्ष यह तीनों ही स्थितियाँ ब्रम्ह की उच्चतर
प्रकृति आत्मा के लिये हैं । आत्मा जब प्रकृतीय मोंह से मुक्त होकर योग की अवस्था
में अपने कर्मदायित्व का निर्वाह करने में सफल हो जाती है तो उसे फलत: मोक्ष
प्राप्त होता है ।
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