शनिवार, 5 मार्च 2016

प्रभव, प्रलय, मोक्ष

रूपों को अवलम्ब देने के लिये उच्च प्रकृति आत्मा की रूप में स्थापना – प्रभव, पुन: रूप की प्रकृति में विलय की दशा – प्रलय, तथा आत्मा की इस प्रभव और प्रलय की बाध्य परिस्थितियों से मुक्ति – मोक्ष यह तीनों ही स्थितियाँ ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा के लिये हैं । आत्मा जब प्रकृतीय मोंह से मुक्त होकर योग की अवस्था में अपने कर्मदायित्व का निर्वाह करने में सफल हो जाती है तो उसे फलत: मोक्ष प्राप्त होता है । 

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