रविवार, 6 मार्च 2016

अनन्य समर्पण

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा हे पार्थ उसी परम् सत्य के अंदर ही यह समस्त परिवरतनशील रूप संसार स्थित है, उस सत्य के अवलम्ब से ही यह समस्त रूप स्थिर है और उस परम् सत्य को अनन्य समर्पण के द्वारा ही पाया जा सकता है । 

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