ब्रम्ह की निम्नतर आठ वर्गीय प्रकृति द्वारा निर्मित रूपों को
ब्रम्ह की अव्यक्त उच्चवर्गीय प्रकृति आत्मा के अवलम्ब से रूपों की उत्पत्ति
अर्थात् उदय और कालांतर से इन समस्त रूपों का प्रकृति में विलय इस सृष्टि की
सामान्य चक्रीय व्यवस्था है । परंतु इन समस्त परिवर्तनों के मध्य वह अपरिवर्तनीय
सत्य जो कि इन समस्त परिवर्तनों से अछूता रहता है वह शाश्वत् ब्रम्ह है । आत्मा
कंचिद अपना दायित्व यथा अपेक्षित निर्वाह करने में सफल हो जाती है तो उसे इस
चक्रीय व्यवस्था से मुक्ति मिला जाती है और वह ब्रम्ह में विलय कर जाती है ।
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