गुरुवार, 3 मार्च 2016

उदय और विलय की व्याख्या

ब्रम्ह की निम्नतर आठ वर्गीय प्रकृति द्वारा निर्मित रूपों को ब्रम्ह की अव्यक्त उच्चवर्गीय प्रकृति आत्मा के अवलम्ब से रूपों की उत्पत्ति अर्थात् उदय और कालांतर से इन समस्त रूपों का प्रकृति में विलय इस सृष्टि की सामान्य चक्रीय व्यवस्था है । परंतु इन समस्त परिवर्तनों के मध्य वह अपरिवर्तनीय सत्य जो कि इन समस्त परिवर्तनों से अछूता रहता है वह शाश्वत् ब्रम्ह है । आत्मा कंचिद अपना दायित्व यथा अपेक्षित निर्वाह करने में सफल हो जाती है तो उसे इस चक्रीय व्यवस्था से मुक्ति मिला जाती है और वह ब्रम्ह में विलय कर जाती है । 

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