सोमवार, 15 जून 2015

बलिदान : चरण 4

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बलिदान द्वारा ब्रम्ह को पाने की प्रक्रिया बताते हुये कहे कि कुछ लोग अपनी इंद्रीय अनुभूतियों को नियंत्रण की अग्नि को आहुति करते हैं, और कुछ लोग इंद्रीय वासना वस्तुओं को इंद्रीय अग्नि को अर्पित करते हैं । व्याख्याकार कहता है कि गुरू का उपरोक्त निर्देश जिज्ञासु को मर्यादित आचरण के जीवन के लिये इंद्रीय नियंत्रण की विधि निर्दिष्ट करने वाले हैं । 

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