भगवद्गीता
मंगलवार, 9 जून 2015
कर्म और अकर्म : चरण 6
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस व्यक्ति के मस्तिष्क में कोई इच्छा नहीं हो
,
उसका हृदय और आत्मा उसके पूर्ण वश में हो
,
वह कार्य में अपनी कर्मेंद्रियों को मात्र यंत्रवत् प्रयोग करता है
,
ऐसे व्यक्ति के कर्म में कोई त्रुटि नहीं होती है ।
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