बलिदान
की श्रंखला का अगला चरण बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बताये
कि कुछ लोग जिन्हें अपनी स्वांस क्रिया के नियंत्रण का अभ्यास होता है,
वे प्राण (बाहर निकलने वाली वायु) को एवं अप्राण (अंदर आने वाली वायु) को क्रमश: रोक रोक कर
क्रमश: प्राण वायु को अप्राण को तथा अप्राण वायु को प्राण को अर्पित करते हैं ।
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