आत्मा
की उत्कण्ठा आत्मज्ञान पाने हेतु । यह ज्ञान मिलेगा । ऐसा विश्वास । आस्था ।
परमात्मा की छवि हम सभी में विद्यमान होती है । मात्र हम उसा छवि के प्रति अचेत
होते हैं । इस छवि का बोध/ज्ञान पाने की उत्कण्ठा यदि मस्तिष्क में व्याप्त हो जाय
और इस ज्ञानको पाने के लिये व्यक्ति इंद्रीय संयम बरतते हुये और हृदय में आस्था धारण
कर प्रयत्नशील होगा तो अवश्य ही उसे ईश्वरीय छवि के दर्शन अपने अंत:करण में
मिलेंगे ।
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