बलिदान
का शाब्दिक अर्थ होता है, किसी कीमती वस्तु को उससे अधिक कीमती
वस्तु पाने के उद्देष्य से आहुत करना त्यागना । भागवद्गीता में कर्म और अकर्म का
उपदेश करने के बाद गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण आत्मा प्रधान जीवन पाने के जिज्ञासु
अर्जुन को बलिदान के द्वारा उद्देष्य प्राप्ति का पथ निर्दिष्ट करते हैं । इस
क्रममें गुरू प्रकृतीय मोंह के जीवन में कीमती मानी जाने वाली विभिन्न स्थितियों को
त्यागने का उपदेश किये हैं । इन बलिदानों का क्रमबद्ध विवरण आगे के अंको में
वर्णित किया जावेगा ।
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