गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि कुछ लोग अपने ग्रहण करने वाले आहार को
संयमित कर अपनी प्राण वायु को ही अपनी प्राण वायु की अग्नि को अर्पित करते हैं ।
ये बलिदान के ज्ञाता लोग बलिदान के द्वारा अपने समस्त पापों को निर्मूल करते हैं ।
व्याख्या –
नियंत्रण ही समस्त बलिदान का मूल होती है । इसलिये बलिदान आत्म-ज्ञान का पथ है ।
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