मंगलवार, 23 जून 2015

सत्य के ज्ञाता व्यक्ति

प्रचलित बलिदान के कर्मों एवं उनकी सार्थकता बताने के उपरांत इन कर्मों की उपलब्धि पथ बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि सत्य के ज्ञाता व्यक्ति से, सेवा भाव से एक जिज्ञासु के रूप में संलग्न होने पर, विनम्र आग्रह के द्वारा यह पथ तुम्हे मिल सकेगा । व्याख्याकार गुरू के उपरोक्त कथन को स्पष्ट करते हुये कहता है कि सत्य के ज्ञाता के अनुभव पर आधारित मार्ग दर्शन ही प्रभावी दिशा निर्देश होगा । 

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