गुरुवार, 3 अगस्त 2017

स्मृति और ज्ञान

जीवित प्राणियों और वनस्पतियों में ब्रम्ह के समाये स्वरूप के विस्तार को और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं सबके हृदय में बैठा हुआ हूँ, मुझसे ही उनकी स्मृति और ज्ञान हैं तथा उनका विनाश भी होता है । वस्तुत: मैं ही वह हूँ, जिसे सब वेदों द्वारा जाना जाता है । मैं ही वेदांत को बनाने वाला हूँ और मैं ही वेदों का जानने वाला हूँ । 

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