भगवद्गीता
सोमवार, 21 अगस्त 2017
इच्छाओं की तृप्ति
असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि असीमित इच्छायें जो कि मृत्यु के साथ ही समाप्त होंगी
,
एवं इच्छापूर्ति को ही सर्वोच्च लक्ष्य मानते हुये और यह समझते हुये कि बस यही सब कुछ हैं
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