असुरीय स्वभाव वाले लोगो के श्रेयों
के विषय में बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं धनवान हूँ
और ऊँचे कुल में उत्पन्न हुआ हूँ, मेरे समान और कौन है ? मैं यज्ञ करूँगा, मैं दान दूँगा,
मैं आनंद मनाऊँगा,’ वे अज्ञान के कारण मूढ बने हुये इस
प्रकार की बाते करते हैं ।
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