भगवद्गीता
बुधवार, 2 अगस्त 2017
जीवन की अग्नि
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जीवित प्राणियों में मैं जीवन की अग्नि बनकर और उनके अंदर आने वाली श्वास तथा बाहर निकलने वाली श्वास में मिलकर चारो प्रकार के अन्नों को पचाता हूँ ।
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