भगवद्गीता
मंगलवार, 1 अगस्त 2017
धारण पोषण
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको बताये कि इस पृथ्वी में प्रविष्ट होकर मैं अपनी प्राण शक्ति द्वारा सब प्राणियों को धारण करता हूँ
,
और रस से भरा हुआ सोम (चंद्रमा) बनकर मैं सब जडी बूटियों (या बनस्पतियों) का पोषण करता हूँ ।
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