गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से
कहे कि इस प्रकार हे पापरहित (अर्जुन),
मैंने तुझे यह सबसे अधिक रहस्यपूर्ण सिद्धांत बता दिया है । हे भारत (अर्जुन), इसको जानने के बाद मनुष्य ज्ञानी बन जाता
है और उसके सब कर्तव्य पूर्ण हो जाते हैं ।
इस प्रकार “पुरुषोत्तम योग” नामक
पंद्रहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें