गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को
बताये कि दैवीय गुणों की सम्पदा मोक्ष को प्रशस्थ करने वाली होती हैं और असुरी
गुणों की सम्पदा बंधन प्रशस्थ करने वाली होती है । हे पाण्डव (अर्जुन) तू दु:खी मत
हो, क्योंकि तू (दिव्य भवितव्यता के
लिये) दिव्य सम्पदा लेकर उत्पन्न हुआ है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें