मंगलवार, 15 अगस्त 2017

मोक्षदायक

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि दैवीय गुणों की सम्पदा मोक्ष को प्रशस्थ करने वाली होती हैं और असुरी गुणों की सम्पदा बंधन प्रशस्थ करने वाली होती है । हे पाण्डव (अर्जुन) तू दु:खी मत हो, क्योंकि तू (दिव्य भवितव्यता के लिये) दिव्य सम्पदा लेकर उत्पन्न हुआ है । 

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