गुरूयोगेश्वर
श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस व्यक्ति ने मोंह का पूर्ण त्याग कर लिया है वह
व्यक्ति अपने कार्यों को ब्रम्ह को समर्पित कर करता है, उसके कार्य में पाप का स्पर्ष भी नहीं
होता है जिस प्रकार कमल का पत्ता पानी में रहते हुये भी पानी को स्पर्ष नहीं करता
है ।
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