मंगलवार, 21 जुलाई 2015

यथार्थ

मुक्त आत्मा के विषय में और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि वह प्रकृति के गुणों के अधीन कोई कार्य नहीं करती है । चूँकि ज्ञान सदैव अज्ञान के आवरण से आच्छादित रहता है इसलिये लोग भ्रमित होकर प्रकृति के गुणों के अधीन कार्य करते हैं । 

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