अर्जुन को ज्ञान का उपदेश देकर गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण उससे कहते हैं
कि हे पार्थ ज्ञान की तलवार से उस मोंह को काटो जो अज्ञान के कारण तुम्हे आच्छादित
किये हुये है । अपने को योग की अवस्था में स्थापित कर अपना कर्तव्य करो ।
गुरू
के इस कथन के साथ ही ज्ञान-योग नामक चतुर्थ अध्याय पूर्ण हुआ ।
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