भगवद्गीता
बुधवार, 8 जुलाई 2015
नित्य सन्यासी
ऐसा व्यक्ति जो प्रतिपल कर्मफल से विरक्ति की भावना से युक्त रहता है । वह कार्य करता है परंतु कर्मफल से कोई सम्बंध ना रखते हुये । ऐसा कर्मयोगी ही सच्चे अर्थों में पूर्ण सन्यासी भी होता है । ऐसे योगी को ही नित्य सन्यासी कहा जाता है ।
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