उचित
का सही निर्णय करने की विवेक में क्षमता जाग्रित होने के फल से प्राप्त होने वाली
स्थिति को बताते हुये
गुरू योगेश्वर
श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि ज्ञानी संत सभी को समभाव से देखते हैं,
चाहे वह विद्वान विनम्र ब्राम्हण होवे, चाहे वह एक गाय होवे,
चाहे एक हांथी होवे, चाहे एक कुत्ता होवे,
चाहे वह एक नीच वर्ण का मनुष्य होवे ।
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