भगवद्गीता
रविवार, 19 जुलाई 2015
आत्मप्रकृति
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को ज्ञान से प्रकाशित आत्मा के लिये बताते हैं कि आत्मा जब अपनी प्रकृति को नियंत्रित कर लिया हो और कर्म प्रेरण में कर्ता के भाव से मुक्त हो गयी हो तो वह इस नौ द्वारो की शरीर में मुक्त दशा में रहती है ।
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