शनिवार, 4 जुलाई 2015

प्रश्न की व्याख्या

व्याख्याकार अर्जुन के प्रश्न का विस्तार बताते हुये कहता है कि अर्जुन का प्रश्न मात्र अर्जुन के परिवेश के व्यक्ति के लिये ही प्रभावी है । जिसे आत्मज्ञान हो गया है उसे किसी कर्म की वाँक्षना नहीं रह जाती है । इसलिये अर्जुन का प्रश्न मात्र उस व्यक्ति के लिये उपयोगी है जिसे आत्म-ज्ञान नहीं हुआ है । ऐसे व्यक्ति के लिये कर्म करना ज्यादा अच्छा पथ है । बिना इच्छा के किया हुआ कर्म बंधनकारी नहीं होता है और ऐसे ही कर्म के लिये भागवद्गीता में अनुशंसा की गई है । 

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