भगवद्गीता
शुक्रवार, 17 जुलाई 2015
आत्मशुद्धि
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि योगी पुरुष अपनी आत्मा की शुद्धि के उद्देष्य से अपनी इंद्रियों
,
मस्तिष्क व विवेक से मात्र कार्य करते हैं परंतु उन कर्मों में आत्मा को कोई आसक्ति नहीं होती है ।
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